Tuesday, 21 November 2017

Poetry in hindi again, use Google translate for instead of hindi if you prefer other language.

समंदर में डूबा था मैं,एक मोती की तलाश मैं,
एक जलपरी मिली मुझे,खो चुका था होश ओ हवास मैं।

क्या गजब है हेना,
उसका जाना तय था,
और मैं उसे खो ना दूँ मुझे इसी बात का भय था।

कुदरत के अपने नियम होते है साहब,
होता वहीँ है जिसका भय हो,
और उसे कोई नहीं रोक सकता जो पहले से तय हो।

मैं दिखावे के लिए रोया झटपटाया,
सोचा किसी का तो होऊंगा ख़ास मैं,
जो होगा एक दिन मेरे पास में,

याद रखिए जनाब,
समंदर में डूबा था मैं, एक मोती की तलाश में।

जिसे सांसों-सांसों में याद करने लगा था,
मुझे क्या पता था,उसका मिलना तय था,
मेरे पास सिर्फ प्यार ही था, जो अनंत और अक्षय था।

सोचता हूँ,
बताता तुझे मैं, अगर होती तू पास में,
समंदर में डूबा था मैं, एक मोती की तलाश में।
Written by karan

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